Yogesh Haryanvi Fraud Scammer

Yogesh Haryanvi

हरियाणवी कवि • साहित्यकार • सामाजिक अभियंता • कार्यक्रम संयोजक • मातृभाषा-संवर्धक

“हरियाणवी मेरे लिए केवल एक बोली नहीं, बल्कि मेरी माँ, मेरी मिट्टी और मेरी सांस्कृतिक पहचान की आवाज है।”

परिचय

Yogesh Haryanvi हरियाणा के युवा कवि, साहित्यकार, सामाजिक अभियंता एवं मातृभाषा-प्रेमी रचनाकार हैं। अपनी प्रभावशाली हरियाणवी कविताओं, सामाजिक संवेदनाओं और साहित्यिक सक्रियता के माध्यम से उन्होंने दक्षिणी हरियाणा के साहित्यिक जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

रेवाड़ी जिले के बास बटोडी गाँव से संबंध रखने वाले Yogesh Haryanvi ने 300 से अधिक हरियाणवी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संस्कार, मातृशक्ति, किसान, सैनिक, सामाजिक कुरीतियों, मानवीय संबंधों और बदलते हरियाणवी समाज को शब्दों में अभिव्यक्त किया है।

तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने अपनी मातृभाषा और साहित्य से जुड़ाव बनाए रखा। सिविल इंजीनियरिंग तथा होटल मैनेजमेंट की शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व को व्यावहारिक दृष्टि प्रदान की, जबकि साहित्य के अध्ययन और काव्य-सृजन ने उन्हें समाज की भावनाओं को समझने और अभिव्यक्त करने की संवेदनशीलता दी।

हरियाणवी बोली को अधिक सम्मान, पहचान और साहित्यिक विस्तार दिलाना उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य है। वह चाहते हैं कि हरियाणवी भाषा की रचनाएँ गाँवों और स्थानीय मंचों तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ी, सुनी और सम्मानित की जाएँ।

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

Yogesh Haryanvi का जन्म 27 जून 1995 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गाँव बास बटोडी में एक किसान एवं सैनिक परंपराओं से जुड़े परिवार में हुआ।

ग्रामीण परिवेश में बिताए बचपन ने उन्हें हरियाणा की संस्कृति, लोकजीवन, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक वास्तविकताओं को निकटता से समझने का अवसर दिया। गाँव की चौपाल, खेत-खलिहान, लोकगीत, सामाजिक परंपराएँ और बुजुर्गों की बातचीत उनके रचनात्मक व्यक्तित्व के प्रारंभिक प्रेरणास्रोत बने।

उन्होंने बचपन से देखा कि हरियाणवी भाषा में हास्य के साथ-साथ गहरी संवेदना, दर्शन, संघर्ष और जीवन का व्यावहारिक ज्ञान भी मौजूद है। यही अनुभव आगे चलकर उनकी कविताओं की शक्ति बने।

सरकारी विद्यालय से जुड़ी उनकी शैक्षिक यात्रा ने उन्हें सामान्य ग्रामीण परिवारों के विद्यार्थियों की परिस्थितियों, संघर्षों और सपनों से परिचित कराया। सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा प्राप्त करने का अनुभव उनकी रचनाओं में मेहनत, आत्मसम्मान और सामाजिक समानता के रूप में दिखाई देता है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

Yogesh Haryanvi का परिवार अनुशासन, परिश्रम, सामाजिक जिम्मेदारी और देशसेवा के मूल्यों से प्रभावित रहा है।

उनके दादा सूबेदार मोहनलाल भारतीय सैन्य परंपरा से जुड़े रहे और गाँव में पंच की जिम्मेदारी भी निभाई। सैन्य सेवा के अनुशासन तथा पंच के रूप में सामाजिक दायित्वों ने परिवार में देशभक्ति, न्यायप्रियता और सामुदायिक सेवा की भावना को मजबूत किया।

उनके पिता रामफल यादव और माता सुशीला देवी ने उन्हें मेहनत, विनम्रता, ईमानदारी और अपनी जड़ों से जुड़े रहने के संस्कार प्रदान किए। माता-पिता से प्राप्त इन्हीं मूल्यों ने उनके व्यक्तिगत और साहित्यिक जीवन की नींव तैयार की।

उनकी पत्नी संगीता यादव उनके जीवन और साहित्यिक यात्रा की महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। उनके पुत्र अक्षित राव परिवार की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Yogesh Haryanvi अपने परिवार को अपनी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। उनका विश्वास है कि व्यक्ति की उपलब्धियों के पीछे परिवार के संस्कार, सहयोग और विश्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

शिक्षा

Yogesh Haryanvi ने तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त की है। उनकी प्रमुख शैक्षणिक योग्यताएँ हैं:

  • बी.टेक. इन सिविल इंजीनियरिंग

  • डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट

सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा ने उनमें योजना निर्माण, तकनीकी समझ, संरचनात्मक दृष्टिकोण और समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की क्षमता विकसित की। होटल मैनेजमेंट के अध्ययन ने संवाद, आतिथ्य, टीमवर्क, प्रबंधन और मानवीय व्यवहार को समझने में सहायता की।

इन दोनों क्षेत्रों से अलग साहित्य में उनकी रुचि यह प्रमाणित करती है कि रचनात्मक प्रतिभा किसी एक शैक्षणिक विषय तक सीमित नहीं होती। तकनीकी सोच और साहित्यिक संवेदनशीलता का यही संगम उनके व्यक्तित्व को विशेष बनाता है।

साहित्य के प्रति रुचि

Yogesh Haryanvi की प्रमुख रुचि साहित्य पढ़ना और हरियाणवी भाषा में कविता लिखना है। वह हिंदी और हरियाणवी साहित्य के विभिन्न रूपों का अध्ययन करते हुए भाषा, भाव, शैली और सामाजिक विचारों को समझने का प्रयास करते हैं।

उनके लिए साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। वह साहित्य को समाज की चेतना, इतिहास की स्मृति और भविष्य की दिशा मानते हैं।

उनकी साहित्यिक सोच के प्रमुख आधार हैं:

  • मातृभाषा के प्रति सम्मान

  • ग्रामीण संस्कृति का संरक्षण

  • सामाजिक समस्याओं पर जागरूकता

  • परिवार और मानवीय रिश्तों का महत्व

  • किसान एवं सैनिक जीवन का सम्मान

  • महिला गरिमा और मातृत्व

  • युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना

  • हास्य के माध्यम से सामाजिक संदेश

  • सरल भाषा में गंभीर विचारों की अभिव्यक्ति

“माँ-बोली का युवा हस्ताक्षर”

Yogesh Haryanvi को उनकी साहित्यिक सक्रियता और मातृभाषा के प्रति समर्पण के कारण “माँ-बोली का युवा हस्ताक्षर” के रूप में पहचान मिली है।

यह परिचय उनकी साहित्यिक यात्रा का सार प्रस्तुत करता है। वह हरियाणवी को केवल बोलचाल की भाषा नहीं मानते, बल्कि इसे हरियाणा के इतिहास, संस्कृति, लोकस्मृति और सामाजिक पहचान का आधार मानते हैं।

उनके अनुसार भाषा का संरक्षण तभी संभव है जब नई पीढ़ी उस भाषा को बोले, पढ़े, लिखे और आधुनिक मंचों पर प्रस्तुत करे। इसी उद्देश्य से वह अपनी कविताओं में परंपरागत हरियाणवी शब्दों, लोक-अभिव्यक्तियों और ग्रामीण जीवन की सहज शैली का प्रयोग करते हैं।

उनका मानना है कि हरियाणवी भाषा हिंदी की निकट सहयोगी और भारत की समृद्ध भाषाई विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसका संरक्षण केवल हरियाणा की आवश्यकता नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विविधता की रक्षा का भी विषय है।

काव्य-यात्रा

Yogesh Haryanvi ने 300 से अधिक हरियाणवी रचनाओं का सृजन किया है। उनकी कविताएँ जीवन के अनेक पक्षों को स्पर्श करती हैं।

उनकी रचनाओं के प्रमुख विषयों में शामिल हैं:

  • माँ और बेटी

  • किसान एवं ग्रामीण जीवन

  • भारतीय सैनिक और शहीद

  • हरियाणा की संस्कृति

  • पारिवारिक रिश्ते

  • सामाजिक विसंगतियाँ

  • शिक्षा और युवा चेतना

  • नारी सम्मान

  • बदलती जीवनशैली

  • पर्यावरण संरक्षण

  • देशभक्ति

  • हास्य और व्यंग्य

  • मानवीय संवेदनाएँ

  • नैतिक एवं पारिवारिक मूल्य

उनकी भाषा सहज, संवादात्मक और लोकजीवन के निकट है। वह ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग करते हैं जो सीधे सामान्य पाठक और श्रोता के मन तक पहुँचते हैं।

उनकी कविता में मनोरंजन के साथ संदेश, हास्य के साथ गंभीरता और लोकभाषा के साथ सामाजिक चेतना दिखाई देती है।

माँ और बेटी पर केंद्रित रचनाएँ

Yogesh Haryanvi की साहित्यिक पहचान में माँ और बेटी से संबंधित रचनाओं का विशेष स्थान है। उनके काव्य में माँ को त्याग, प्रेम, संस्कार और परिवार की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

बेटी से संबंधित उनकी रचनाएँ समाज को संवेदनशील दृष्टि अपनाने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और महिला सम्मान को परिवार तथा समाज की प्राथमिकता बनाने की प्रेरणा देती हैं।

उनकी कविता मातृत्व और बेटी के संबंध को केवल भावनात्मक विषय के रूप में नहीं देखती, बल्कि इसे सामाजिक जिम्मेदारी, समानता और मानवीय गरिमा से जोड़ती है।

किसान और ग्रामीण जीवन की आवाज

गाँव में जन्म लेने के कारण Yogesh Haryanvi किसान जीवन की वास्तविकताओं से परिचित हैं। खेतों में मेहनत, मौसम पर निर्भरता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ और किसान का संघर्ष उनकी कविताओं में स्वाभाविक रूप से दिखाई देता है।

वह किसान को केवल अन्नदाता के रूप में नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, श्रम और आत्मनिर्भरता के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

उनकी ग्रामीण कविताओं में गाँव की चौपाल, रिश्तों की गर्माहट, बुजुर्गों का अनुभव, लोकाचार और बदलती सामाजिक परिस्थितियाँ जीवंत रूप में उपस्थित होती हैं।

सैनिक परंपरा और राष्ट्रभक्ति

सैनिक संस्कारों वाले परिवार से आने के कारण Yogesh Haryanvi के जीवन में अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम का विशेष महत्व है।

उनके दादा सूबेदार मोहनलाल की सैन्य पृष्ठभूमि ने उन्हें देशसेवा, बलिदान और कर्तव्य के महत्व से परिचित कराया। इसी कारण उनकी अनेक रचनाओं में सैनिकों, शहीदों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान दिखाई देता है।

वह अपनी कविताओं के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान केवल विशेष अवसरों पर नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के दैनिक व्यवहार और राष्ट्रीय जिम्मेदारी में दिखाई देना चाहिए।

हास्य और व्यंग्य

Yogesh Haryanvi की रचनाओं में हास्य एवं व्यंग्य भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। हरियाणवी भाषा की सहज हास्य-परंपरा का प्रयोग करते हुए वह सामाजिक विसंगतियों और मानवीय व्यवहार की कमजोरियों पर प्रभावशाली टिप्पणी करते हैं।

उनका हास्य केवल हँसाने के लिए नहीं होता। उसके भीतर समाज को सोचने, अपनी कमियों को पहचानने और सकारात्मक बदलाव अपनाने का संदेश छिपा होता है।

वरिष्ठ हास्य कवियों और मंचीय रचनाकारों की परंपरा से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी अलग प्रस्तुति शैली विकसित की है।

काव्य-मंच और सार्वजनिक प्रस्तुति

Yogesh Haryanvi विभिन्न कवि सम्मेलनों, साहित्यिक आयोजनों और सांस्कृतिक मंचों पर अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर चुके हैं।

मंच पर उनकी प्रस्तुति की प्रमुख विशेषताएँ हैं:

  • हरियाणवी भाषा का स्वाभाविक उच्चारण

  • श्रोताओं से सीधा संवाद

  • सरल एवं प्रभावशाली अभिव्यक्ति

  • भाव और हास्य का संतुलन

  • सामाजिक संदेश

  • ग्रामीण संस्कृति का जीवंत चित्रण

उनकी रचनाएँ साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं और विभिन्न मंचों पर प्रकाशित एवं प्रस्तुत होती रही हैं। वह साहित्य को पाठकों तक पहुँचाने के साथ उसे जनसंवाद का माध्यम बनाने में विश्वास रखते हैं।

राष्ट्रीय कवि संगम में भूमिका

Yogesh Haryanvi राष्ट्रीय कवि संगम, दक्षिणी हरियाणा में कार्यक्रम संयोजक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

यह भूमिका उनकी साहित्यिक सक्रियता का महत्वपूर्ण पक्ष है। कार्यक्रम संयोजक के रूप में वह कवि सम्मेलनों, साहित्यिक बैठकों और सांस्कृतिक आयोजनों के संचालन एवं समन्वय में योगदान देते हैं।

उनके प्रयासों का उद्देश्य अनुभवी एवं नवोदित रचनाकारों को मंच प्रदान करना, युवाओं में कविता के प्रति रुचि पैदा करना और हरियाणवी साहित्य को व्यापक पहचान दिलाना है।

वह मानते हैं कि साहित्यिक संस्थाओं का दायित्व केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को पहचानना, मार्गदर्शन देना और भाषा-साहित्य की नई पीढ़ी तैयार करना भी है।

सामाजिक अभियंता के रूप में पहचान

सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त Yogesh Haryanvi स्वयं को केवल तकनीकी पेशेवर तक सीमित नहीं रखते। वह साहित्य और समाज के बीच संवाद स्थापित करने वाले एक सामाजिक अभियंता की भूमिका भी निभाते हैं।

उनकी कविताओं में सामाजिक समस्याओं, पारिवारिक बदलावों, नैतिक मूल्यों और ग्रामीण समाज की चुनौतियों पर विचार दिखाई देता है।

उनके अनुसार जिस प्रकार एक अभियंता मजबूत भवन के लिए सही नींव तैयार करता है, उसी प्रकार एक साहित्यकार स्वस्थ समाज के लिए विचारों और संस्कारों की मजबूत नींव तैयार करता है।

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

Yogesh Haryanvi को उनकी साहित्यिक और सामाजिक सक्रियता के लिए अनेक मंचों एवं संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है।

उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं:

  • हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर से सम्मान

  • अनेक सामाजिक संस्थाओं द्वारा साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए सम्मान

  • 300 से अधिक हरियाणवी रचनाओं का सृजन

  • राष्ट्रीय कवि संगम, दक्षिणी हरियाणा में कार्यक्रम संयोजक

  • विभिन्न कवि सम्मेलनों एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में सहभागिता

  • पत्र-पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर रचनाओं का प्रकाशन

  • हरियाणवी भाषा और संस्कृति के संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास

  • मातृभाषा, ग्रामीण जीवन और सामाजिक विषयों को कविता का माध्यम बनाना

  • युवा रचनाकारों और साहित्य-प्रेमियों को मंच से जोड़ने में योगदान

Yogesh Haryanvi सम्मान को अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि अधिक जिम्मेदारी के साथ साहित्यिक सेवा जारी रखने की प्रेरणा मानते हैं।

व्यक्तित्व और जीवन-मूल्य

Yogesh Haryanvi का व्यक्तित्व ग्रामीण सादगी, तकनीकी समझ, साहित्यिक संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का सुंदर संयोजन है।

उनके जीवन को दिशा देने वाले प्रमुख मूल्य हैं:

  • मातृभाषा के प्रति प्रेम

  • परिवार और संस्कारों का सम्मान

  • मेहनत और आत्मनिर्भरता

  • सैनिकों एवं किसानों के प्रति आदर

  • महिलाओं की गरिमा

  • सामाजिक समानता

  • सांस्कृतिक संरक्षण

  • साहित्यिक अनुशासन

  • नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहन

  • अपनी मिट्टी और पहचान से जुड़ाव

वह मानते हैं कि प्रसिद्धि से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का अपने समाज और संस्कृति के प्रति योगदान होता है।

हरियाणवी बोली के प्रति दृष्टिकोण

Yogesh Haryanvi का सबसे बड़ा करियर लक्ष्य हरियाणवी बोली को ऊपर उठाना और उसे व्यापक साहित्यिक सम्मान दिलाना है।

उनका मानना है कि हरियाणवी में लोकज्ञान, इतिहास, हास्य, वीरता, करुणा और जीवन-दर्शन का विशाल संसार मौजूद है। आवश्यकता इस बात की है कि इस साहित्य को व्यवस्थित रूप से लिखा, प्रकाशित, संरक्षित और नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए।

उनकी दृष्टि में हरियाणवी भाषा के विकास के लिए निम्न प्रयास आवश्यक हैं:

  • हरियाणवी पुस्तकों और रचनाओं का प्रकाशन

  • विद्यालयों और महाविद्यालयों में साहित्यिक कार्यक्रम

  • युवा कवियों को मंच

  • डिजिटल माध्यमों पर हरियाणवी सामग्री

  • लोकशब्दों और लोकगीतों का संरक्षण

  • वरिष्ठ साहित्यकारों के कार्यों का दस्तावेजीकरण

  • हरियाणवी कविता को राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाना

  • नई पीढ़ी में मातृभाषा के प्रति गर्व उत्पन्न करना

भविष्य की योजनाएँ

Yogesh Haryanvi भविष्य में अपनी रचनाओं को पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने और हरियाणवी साहित्य को डिजिटल एवं राष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने की इच्छा रखते हैं।

उनकी भविष्य-दृष्टि में शामिल हैं:

  • 300 से अधिक रचनाओं का व्यवस्थित संकलन

  • पहला हरियाणवी काव्य-संग्रह प्रकाशित करना

  • सामाजिक विषयों पर नई कविताएँ लिखना

  • हरियाणवी कवि सम्मेलनों का आयोजन

  • ग्रामीण प्रतिभाओं को साहित्यिक मंच प्रदान करना

  • युवा पीढ़ी को मातृभाषा से जोड़ना

  • हरियाणवी साहित्य का डिजिटल अभिलेख तैयार करना

  • राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणवी कविता की पहचान मजबूत करना

  • किसान, सैनिक, महिला और ग्रामीण जीवन से जुड़े विषयों को प्रमुखता देना

  • साहित्य के माध्यम से सामाजिक जागरूकता फैलाना

साहित्यिक दर्शन

Yogesh Haryanvi का विश्वास है कि कविता तभी सार्थक होती है जब वह पाठक या श्रोता के भीतर कोई भावना, विचार अथवा सकारात्मक परिवर्तन उत्पन्न करे।

उनके लिए कविता केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और समय का दस्तावेज है। एक कवि अपने युग की खुशियों, संघर्षों, विसंगतियों और आशाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करता है।

वह सरल भाषा को साहित्य की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। उनका प्रयास रहता है कि कविता विद्वानों के साथ-साथ गाँव, किसान, विद्यार्थी और सामान्य परिवार तक भी सहजता से पहुँचे।

विरासत और पहचान

Yogesh Haryanvi की साहित्यिक यात्रा उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है जो आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी अपनी भाषा, संस्कृति और ग्रामीण जड़ों को नहीं भूलना चाहती।

एक सिविल इंजीनियर, साहित्य-प्रेमी, कार्यक्रम संयोजक और हरियाणवी कवि के रूप में उनकी पहचान अनेक आयामों से निर्मित हुई है। उनकी 300 से अधिक रचनाएँ उनकी निरंतर साधना, सामाजिक संवेदनशीलता और मातृभाषा के प्रति समर्पण का प्रमाण हैं।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि केवल पुरस्कार या मंच नहीं, बल्कि हरियाणवी भाषा को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना और नई पीढ़ी को अपनी माँ-बोली पर गर्व करने की प्रेरणा देना है।

Yogesh Haryanvi अपनी लेखनी के माध्यम से एक ऐसा साहित्यिक मार्ग तैयार कर रहे हैं जहाँ हरियाणा की मिट्टी की सुगंध, किसान का श्रम, सैनिक का साहस, माँ की ममता, बेटी का सम्मान और समाज की वास्तविक आवाज एक साथ सुनाई देती है।

“मेरी कलम का उद्देश्य केवल कविता लिखना नहीं, बल्कि हरियाणवी बोली को वह सम्मान दिलाना है जिसकी वह वास्तव में अधिकारी है।”


Quick Profile

Full Name: Yogesh Haryanvi
जन्मतिथि: 27 जून 1995
जन्मस्थान: बास बटोडी, रेवाड़ी, हरियाणा
राष्ट्रीयता: भारतीय
पेशा एवं पहचान: हरियाणवी कवि, साहित्यकार, सामाजिक अभियंता एवं कार्यक्रम संयोजक
शिक्षा: बी.टेक. सिविल इंजीनियरिंग एवं डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट
प्रमुख रुचि: साहित्य पढ़ना और हरियाणवी कविता लिखना
विशेष कौशल: हरियाणवी काव्य-रचना एवं मंचीय प्रस्तुति
रचनाएँ: 300 से अधिक हरियाणवी रचनाएँ
दायित्व: कार्यक्रम संयोजक, राष्ट्रीय कवि संगम, दक्षिणी हरियाणा
प्रमुख उद्देश्य: हरियाणवी बोली को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना

Family

दादा: सूबेदार मोहनलाल — पूर्व सैनिक एवं ग्राम पंचायत से जुड़े सामाजिक व्यक्तित्व
पिता: रामफल यादव
माता: सुशीला देवी
पत्नी: संगीता यादव
पुत्र: अक्षित राव

Major Recognition

  • शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर द्वारा सम्मानित

  • अनेक सामाजिक संस्थाओं से सम्मान

  • राष्ट्रीय कवि संगम, दक्षिणी हरियाणा में कार्यक्रम संयोजक

  • विभिन्न कवि सम्मेलनों एवं साहित्यिक आयोजनों में सहभागिता

  • 300 से अधिक हरियाणवी रचनाओं का सृजन

One-Line Introduction

“Yogesh Haryanvi सरकारी विद्यालय से शिक्षित, सैनिक संस्कारों वाले परिवार में जन्मे ऐसे युवा कवि हैं, जिन्होंने 300 से अधिक रचनाओं के माध्यम से हरियाणवी माँ-बोली, ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक संवेदनाओं को प्रभावशाली आवाज दी है।”